Deutungen zu einer bestimmten Inschrift mit Literaturangaben - Ergebnisse |
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Es wurden 17 Deutungen zum/zur Goldhorn von Gallehus (KJ43 DR12) gefunden:
| Inschrift: | ekhlewagastiʀ ˈ holtijaʀ ˈ horna ˈ tawido ˈ |
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| 1. Deutung: | ek Hlewagastiʀ Holtijaʀ horna tawidō. |
| Wahrscheinlichkeit: | |
| Übersetzung: | Ich, Hlewagastiʀ, Holtijaʀ (=Sohn des Holtaʀ), machte das Horn. |
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| Literaturangaben: | |||||
| Nr. | Autor | Titel | Jahr | ||
| 1 | Marstrander, Carl Johan Sverdrup. | De nordiske runeinnskrifter i eldre alfabet. Skrift og språk i folkevandringstiden. In: Viking, 16, 1952, 1-277 (=Særtryk af Viking 1952). | 1952a | ||
| 2 | Krause, Wolfgang. | Die Runendenkmäler und ihre Sprache. In: Von der Bronzezeit bis zur Völkerwanderungszeit, (hg.) Klose, Olaf. Neumünster 1964 [Neue Ausgabe: 1979], 311-325. | 1964b [1979] | ||
| 3 | Musset, Lucien. | Introduction à la runologie. Paris 1965. | 1965 | ||
| 4 | Moltke, Erik. | Runerne i Danmark og deres oprindelse. København 1976. | 1976 | ||
| 5 | Nielsen, Niels Åge. | Danske Runeindskrifter. København 1983. | 1983 | ||
| 6 | Moltke, Erik. | Runes and Their Origin. Denmark and Elsewhere. Copenhagen 1985. | 1985 | ||
| 7 | Marchese, Maria Pia. | 'Ego' nel formulario delle rune. In: Studi linguistichi e filologici per Carlo Alberto Mastrelli, (hg.) Agostiani, Luciano et al., Pisa 1985, 247-261. | 1985 | ||
| 2. Deutung: | ek Hlēwagastiz Holtijaz horna tawidō. |
| Wahrscheinlichkeit: | - |
| Übersetzung: | Ich, Hlēwagastiz (Grabgast), Holtijaz (der aus Holt), machte das Horn. |
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| Literaturangaben: | |||||
| Nr. | Autor | Titel | Jahr | ||
| 1 | Looijenga, Tineke. | Texts and Contexts of the Oldest Runic Inscriptions. Leiden, Boston 2003. | 2003b | ||
| 3. Deutung: | ek Hlewagastiʀ Holtijaʀ horna tawidō. |
| Wahrscheinlichkeit: | - |
| Übersetzung: | Ich, Hlewagastiʀ, Holtijaʀ (=der Sohn des Holt/der aus Holt) machte die beiden Hörner. |
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| Literaturangaben: | |||||
| Nr. | Autor | Titel | Jahr | ||
| 1 | Vennemann, Theo. | Wer hat das andere Horn gemacht? Zum Numerus von horna in der Gallehus-Inschrift. In: Beiträge zur Geschichte der deutschen Sprache und Literatur (West), 111, 1989, 355-368. | 1989 | ||
| 4. Deutung: | ek Hlewagastiz Holtijaz horna tawidō. |
| Wahrscheinlichkeit: | |
| Übersetzung: | Ich, Hlewagastiz (=geschützter Gast), Holtijaz (=Sohn von Holtagastiz/Holta), machte das Horn. |
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| Literaturangaben: | |||||
| Nr. | Autor | Titel | Jahr | ||
| 1 | Antonsen, Elmer H. | A Concise Grammar of the Older Runic Inscriptions. Tübingen 1975. | 1975b | ||
| 2 | Eythórsson, Thórhallur. | The Syntax of Verbs in Early Runic. In: Working Papers in Scandinavian Syntax, 67, 2001, 1-55. | 2001 | ||
| 3 | Antonsen, Elmer H. | Runes and Germanic Linguistics. Berlin, New York 2002. | 2002b | ||
| 5. Deutung: | ek Hlewagastiʀ Lewagastiʀ Holtijaʀ horna tawidō (l)awidō. |
| Wahrscheinlichkeit: | - |
| Übersetzung: | Ich, Hlewagastiʀ/Lewagastiʀ, Holtijaʀ (=der zum heiligen Hain gehörige, der Priester), machte/entrindete das Horn. |
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| Literaturangaben: | |||||
| Nr. | Autor | Titel | Jahr | ||
| 1 | Klingenberg, Heinz. | Runenschrift - Schriftdenken - Runeninschriften. Heidelberg 1973. | 1973 | ||
| 6. Deutung: | ek Hlewagastiz Hōltijaz horna tawidō. |
| Wahrscheinlichkeit: | - |
| Übersetzung: | Ich, Hlewagastiz, Hōltijaz, machte das Horn. |
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| Literaturangaben: | |||||
| Nr. | Autor | Titel | Jahr | ||
| 1 | Andersen, Harry. | Guldhornsindskriften. In: Aarbøger for Nordisk Oldkyndighed og Historie, 1961, 89-121. Und in: Runologica. Harry Andersens udvalgte runologiske afhandlinger. Udgivne på hans 70 års dag 21.2.1971 af Selskab for Nordisk Filologi København. København1971, 108-137. | 1961b [1971] | ||
| 7. Deutung: | ek Hlewagastiʀ Holtijaʀ horna tawidō. |
| Wahrscheinlichkeit: | |
| Übersetzung: | Ich, Hlewagastiʀ (=Gast an einem beschützten Ort), Holtijaʀ (=der zum (heiligen) Wald Gehörige) machte/opferte das Horn. |
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| Literaturangaben: | |||||
| Nr. | Autor | Titel | Jahr | ||
| 1 | Hube, Hans Jürgen. | Die Inschrift des Goldhorns von Gallehus. Zur Vorgeschichte des Deutschen. In: Sprachpflege, 31, 1982, 145-147. | 1982 | ||
| 2 | Grønvik, Ottar. | Runeinnskriften på gullhornet fra Gallehus. In: Maal og Minne, 1999, 1-18. | 1999a | ||
| 8. Deutung: | ek Hlewagastiz Holtijaz horna tawidō. |
| Wahrscheinlichkeit: | |
| Übersetzung: | Ich, Hlewagastiʀ (=Gast/Fremder, der Schutz sucht), Holtijaʀ (=Waldbewohner), machte das Horn. |
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| Literaturangaben: | |||||
| Nr. | Autor | Titel | Jahr | ||
| 1 | Karker, Allan. | Dansk i tusind år. Et omrids af sprogets historie. København 1993. | 1993 | ||
| 9. Deutung: | ek Hlewagastiz Holtijaz horna tawidō. |
| Wahrscheinlichkeit: | |
| Übersetzung: | Ich, Hlewagastiʀ (=Ruhmes-Gast), Holtijaʀ (=Waldbewohner), machte das Horn. |
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| Literaturangaben: | |||||
| Nr. | Autor | Titel | Jahr | ||
| 1 | Karker, Allan. | Dansk i tusind år. Et omrids af sprogets historie. København 1993. | 1993 | ||
| 10. Deutung: | ek Hlewagastiʀ Holtingaʀ horna tawidō. |
| Wahrscheinlichkeit: | - |
| Übersetzung: | Ich, Hlewagastiʀ, Holtingaʀ (=Nachkomme des ...), machte das Horn. |
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| Literaturangaben: | |||||
| Nr. | Autor | Titel | Jahr | ||
| 1 | Kristensen, Marius. | Sønderjyllands Runemindesmærker. In: Fortid og Nutid, 4, 1923, 187-195. | 1923 | ||
| 11. Deutung: | ek Hlewagastiʀ Holtijaʀ horna (al)awidō. |
| Wahrscheinlichkeit: | - |
| Übersetzung: | Ich, Hlewagastiʀ, Holtijaʀ (Sohn des *Holta), beschützte das Horn. |
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| Literaturangaben: | |||||
| Nr. | Autor | Titel | Jahr | ||
| 1 | Marstrander, Carl Johan Sverdrup. | De gotiske runeminnesmerker. In: Norsk Tidsskrift for Sprogvidenskap, 3, 1929, 25-157. | 1929a | ||
| 12. Deutung: | ek Hlewagastiʀ Holtingaʀ horna tawidō. |
| Wahrscheinlichkeit: | - |
| Übersetzung: | Ich, Hlewagastiʀ (=Gast/Fremder, der Schutz sucht/findet), Holtingaʀ (=Nachkomme/Sohn des Holta), machte das Horn. |
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| Literaturangaben: | |||||
| Nr. | Autor | Titel | Jahr | ||
| 1 | Bugge, Sophus. | Guldhorn-Indskriften. In: Tidskrift for Philologi og Pædagogik, 6, 1865, 317-318. | 1865 | ||
| 2 | Bugge, Sophus. | Bidrag til Tydning af de ældste Runeindskrifter. In: Tidskrift for Philologi og Pædagogik, 7, 1866/1867, 211-252, 312-363. | 1866/1867 | ||
| 3 | Wimmer, Ludvig. | Runemindesmærkerne i Sønderjylland som vidnesbyrd om landets nationalitet. In: Haandbog i det Nordslesvigske Spørgsmaals Historie, udg. af de Samvirkende Sønderjydske Foreninger. Kjøbenhavn 1901, 9-60. | 1901 | ||
| 4 | Jóhannesson, Alexander. | Grammatik der urnordischen Runeninschriften. Heidelberg 1923. | 1923 | ||
| 13. Deutung: | ek Hlewagastiʀ Holtijaʀ horna tawidō. |
| Wahrscheinlichkeit: | |
| Übersetzung: | Ich, Hlewagastiʀ (=ruhmvoller Fremdling), Holtijaʀ (=Sohn/Nackomme des Holta), machte das Horn. |
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| Literaturangaben: | |||||
| Nr. | Autor | Titel | Jahr | ||
| 1 | Krause, Wolfgang. | Runeninschriften im älteren Futhark. Halle (Saale) 1937. | 1937a | ||
| 2 | Oxenstierna, Erik Graf. | Die Goldhörner von Gallehus. Lidingö (Selbstverlag) 1956. | 1956 | ||
| 3 | Krause, Wolfgang. | Die Runendenkmäler und ihre Sprache. In: Von der Bronzezeit bis zur Völkerwanderungszeit, (hg.) Klose, Olaf. Neumünster 1964 [Neue Ausgabe: 1979], 311-325. | 1964b [1979] | ||
| 4 | Krause, Wolfgang, Herbert Jankuhn. | Die Runeninschriften im älteren Futhark. Göttingen 1966. | 1966 | ||
| 5 | Krause, Wolfgang. | Die Sprache der urnordischen Runeninschriften. Heidelberg 1971. | 1971 | ||
| 14. Deutung: | ek Hlewagastiz Holtijaz horna tawidō. |
| Wahrscheinlichkeit: | |
| Übersetzung: | Ich, Hlewagastiz (=berühmter/Ruhm-Gast), Holtijaz (=Sohn des Holtagastiz/Holta), machte das Horn. |
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| Literaturangaben: | |||||
| Nr. | Autor | Titel | Jahr | ||
| 1 | Antonsen, Elmer H. | A Concise Grammar of the Older Runic Inscriptions. Tübingen 1975. | 1975b | ||
| 2 | Antonsen, Elmer H. | Runes and Germanic Linguistics. Berlin, New York 2002. | 2002b | ||
| 15. Deutung: | ek Hlewagastiʀ Holtingaʀ horna tawidō. |
| Wahrscheinlichkeit: | - |
| Übersetzung: | Ich, Hlewagastiʀ, Holtingaʀ (=Einwohner von Holt), machte das Horn. |
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| Literaturangaben: | |||||
| Nr. | Autor | Titel | Jahr | ||
| 1 | Schütte, Gudmund. | Guldhornenes Hjemstavn. In: Gads Danske Magasin, 17, 1923, 444-451. | 1923 | ||
| 16. Deutung: | ek Hlewagastiʀ Holtingaʀ horna tawidō. |
| Wahrscheinlichkeit: | - |
| Übersetzung: | Ich, Hlewagastiʀ, Holtingaʀ (=aus Holt), machte das Horn. |
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| Literaturangaben: | |||||
| Nr. | Autor | Titel | Jahr | ||
| 1 | Jóhannesson, Alexander. | Grammatik der urnordischen Runeninschriften. Heidelberg 1923. | 1923 | ||
| 17. Deutung: | ek Hlewagastiʀ Holtijaʀ horna tawidō. |
| Wahrscheinlichkeit: | - |
| Übersetzung: | Ich, Hlewagastiʀ (der den Berühmten, den Opferstier als Gast hat), Holtijaʀ (der zum Gehölz, dem heiligen Hain, Gehörige), habe das Horn [zum kultischen Gebrauch] zubereitet. |
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| Literaturangaben: | |||||
| Nr. | Autor | Titel | Jahr | ||
| 1 | Schneider, Karl. | Rez. Rooth 1984. In: Beiträge zur Namenforschung, N.F. 20, 1985, 90f. Und in: Schneider, Karl. Runstafas. Runische Zeugnisse zur Sprach-, Kultur- und Religionsgeschichte vor allem der Angelsachsen. Aufsätze und Rezensionen 1956-1993. Münster 1994,406-409. | 1985 [1994] | ||